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मन क़ो अन्य प्राणियों से अलग करने वाली उसे विशिष्ट सिद्धि करने वाली कोई चीज़ इस शरीर में है-
 तो वो है मस्तिष्क ,जहाँ विचार ,कल्पना ,इक्छाएं और भावनाएं बसती है । शरीर के अन्य किसी भी 
अव्यय में इतनी सक्रियता ,संवदेनशीलता और पेना पन नही होता ,जितना की मस्तिक में । उसकी 
विशेषताओ के कारण ही मस्तिष्क को मानवीय -सत्ता का केंद्र -बिंदु आधार माना जाता है । रेलगाड़ी
 में जो महत्व इंजन का होता है ,वही महत्व मानव शरीर मे मस्तिष्क  है । इसीलिए मस्तिष्क की 
हड्डियो से बनी एक पिटारी मे रखी लुगदी की -छोटी सी टोकरी को समस्त ज्ञान -विज्ञानं और सभ्यता 
के विकाश का आधार भूत केंद्र कहा गया है । जब कभी किसी को बहुत अधिक सम्मान ,बहुत अधिक 
स्नेह और बहुत अधिक प्यार दिया जाता है तो यही कहा जाता है की उसे सर पे बिठा लिया गया । 
सम्मानित व्यक्ति के लिए सरताज संबोधन ,विशेषण का उपयोग अकारण या निरर्थक ही नहीं है । यह 
संबोधन ,विशेषण मस्तिष्क के ,सिर के महत्व को प्रतिपादित करते है । 
                  हमारा मानना है की कल्पवृझ के निचे बैठने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है । ऐसे 
वृझ का अस्तित्व इस प्रकृति जगत में असंभव है,लेकिन एक प्रत्यछ  कल्पवृझ मनुष्य को मस्तिष्क के 
रूप में मिला हुआ है , जिसकी आराधना से वह सब कुछ अनायस ही प्राप्त होता रहता है ,जिनकी मनुष्य कामना व आराधना करता है । हमारा शरीर तो माँ के गर्भ से जन्म लेता है, परन्तु भले -बुरे व्यक्ति का 
जन्म कहा से होता है ?  जरा आप गौर से सोचोगे और इसकी खोज करोगे तो आपको इसका उत्तर मिलेगा ॥ 
      

                                                                                                                  to be continued..........
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Ram Khedia

I am not a professional writer. Being a human being, I have feelings which my heart cannot fathom.. .

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