सारी अपराध की जड़ - जर और जोरू
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आज तक इतिहास गवाह है सारे लड़ाई /झगडे के पीछे 2 ही कारन होते है या तो जर या जोरू (जमीन/जायदाद या बीवी /गर्लफ्रेंड )। और सचाई यह है इन दोनो मे साथ आपके कोई नही जाता - जिस जगह के लिए हम यहाँ लड़ते है वो जगह वही रहती है बस उसके ऊपर रहने वाले इन्सान अकसर बदल जाते है पर इन्हें साथ कोई नही
ले जा पाया आजतक, तो सवाल ये है की जिस वस्तु को हम ले जा न सके अपने साथ उसके लिए सारा जीवन कलह करते -करते बिता देते है और हमारे साथ कुछ नहीं जाता फिर इस मृगतृष्णा में क्यू रहते है की ये हमारा है ?
सोचने वाली बात ये है की कुछ रह जाता है तो हमारी यादें हमारे अच्छे कार्य जो हमने अपने जीवन काल में किया हो ।
अब बात करते है जोरू की - तो मेरे अनुमान से जब तक ये आपके कदम से कदम मिला के चलती है तब तक ये आपके नाम - सौर्य को बढ़ाती है अगर आप से ये हट कर फैसले ले तो ये आपके वंस के नास का कारन बन जाती है । इनका चरित्र ही आपको "सौर्य या विनास" के राह पे ले जाता है ।
अगर हम भूतकाल मे जाते है और इतिहास के पन्नो को पलटे तो महाभारत होने का कारन भी यही था ? और रामायण की रचना में भी इन्ही का वर्णन है । अगर इस दुनिया में आप रह के कुछ पाना चाहते है तो आप कितनो के साथ आप अपना मधुर समंध बना सके , उनके दिल में अपने लिए जगह बना सके ,क्यू की इस दुनिया में आने वाले हर इंसान को जाना अनिवार्य है बस आप के याद , आपकी दी हुई क़ुर्बानियां ही याद रेह जायंगे और लोग आपको याद रखेंगे । इसलिए अपने जीवन के धर्म कांटे को चलने के लिए लोभ - लालच को त्याग के अपने जीवन का आनंद लेना चाहिए और चरित्र हिन् स्त्री से दुरी बनाए रखना अति आवस्यक है ।