श्रद्धा या अन्धविश्वास
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के बक्सर बलिहार गांव के रहने वाले है उन्होंने खुद कि बलि दे डाली उनकी श्रद्धा "माँ छित्र-
मस्तिका"के प्रति देख कर मे अति विचलित हो गया की आज के इस आधुनिक युग भी प्रतिमा
पुजा के पीछे इतनी आस्था है , जो अपना बलिदान दे सके मुझे कही देखने को नही मिला ।
आजतक मैंने सिर्फ ये देखा है की मंदिर में पूजा के लिए लोगो में आस्था है , श्रद्धा है ,लोग मन्नत मांगते है उनकी मन्नत पूरी होने पे वे जानवरो की बलि दे देते है । पर खुद की बलि देना मेने सिर्फ किताबो में पढ़ा था या अपने बुजुर्गो से सुना था , पर सच में कोई ऐसा कर सकता है आज पहली बार जानने को मिला ।
*क्या उसकी कोई मनोकामना पूर्ण हुई थी ?
*उसने ऐसा क्यो किया , क्या उसकी श्रद्धा थी एक अंध्विश्वास है ये ?
*अगर ये अन्धविश्वास है ? तो बेजुबान जानवरो की बलि देना अंध्विश्वास नही है क्या ?
*कभी ईश्वर ने हमें ये कहा है क्या? की खुद की बली दो या किसी बेज़ुबान जानवर की अगर नहीं तो हम ऐसा क्यों करते है ?
आज "संजय बट " ने अपना बलिदान दिया माँ के लिए इतनी श्रद्धा दिखाई इससे लोग पागल केह रहे है क्या वे लोग पागल नहीं जो बेज़ुबान जानवरो की बलि देते है अपने स्वार्थ के लिए ?क्या ये अंध्विश्वास नहीं ?
अगर अन्धविश्वास है तो आप क्यों देते हो ? और श्रद्धा है विश्वास है तो "संजय बट "की आस्था का मजाक क्यों बनाया जा रहा है ?
ये एक छोटा सा सवाल है जिसे में जानना चाहता हूँ , पर शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं होगा ।
पर में इस बात पे कुछ कहना चाहता हु कही न कही - कोई न कोई शक्ति तो है जिससे ये दुनिया चलती है ।
जन्म लेने के बाद उसकी मृत्यु निश्चित होती है उसी प्रकार ये भी सत्य है की ईश्वर ने हमें कभी नहीं कहा आप बलि दो अगर आपकी आस्था उनपे है तो आप अपने बुराई की बलि दो , घमंड की बलि दो ।
मेरी नज़र में नहीं लगता संजय बट ने कुछ गलत किया आज उन्होंने अपनी बलि देकर हमें सच्चाई से रूबरू करवाया है और अपना बलिदान दे कर कर खुद को अमर कर लिया है आज के बाद लोग हमेशा उन्हें याद रखेंगे की माँ छित्रमस्तिका के एक ऐसे भक्त थे जिन्होंने अपनी श्रद्धा से खुद की बलि दी थी भगवन उनकी आत्मा को शांति दे ।